Baba Jamal Shah Dargah: ललितपुर में हजरत बाबा जमालशाह के उर्स का आगाज, दो दिन गूंजेगी महफिल-ए-कव्वाली

Baba Jamal Shah Dargah: उत्तर प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे ललितपुर जनपद में एक ऐसी दरगाह है जहां पर दूर-दूर से अकीदतमंद पहुंचकर यहां पर बनी सूफी संत बाबा जमालशाह की दरगाह में भक्त हाजिरी लगाते हैं। यह स्थान ललितपुर तालबेहट के बीच में ग्राम टेटा जमालपुर में स्थित है। यहां पर हर वर्ष हजरत बाबा जमालशाह दरगाह पर उर्स लगता है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी दरगाह पर 76वों उर्स का शुभारंभ धार्मिक उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हो गया है।

25 अप्रैल की सुबह करीब 8 बजे उर्स का आगाज कुरान ख्वानी के साथ किया गया। इस दौरान दरगाह परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा और अकीदतमंदों ने सूफी संत के बताए रास्ते पर चलने की दुआ मांगी। उर्स के पहले दिन से ही दरगाह पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी, जो बाबा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करने पहुंचे थे।

Baba Jamal Shah Dargah: शहर में निकली चादर शरीफ की रौनक

शाम के समय उर्स की सबसे अहम परंपरा, चादर शरीफ का आयोजन किया गया। यह चादर शहर के बस स्टैंड से बड़े ही सम्मान और श्रद्धा के साथ निकाली गई। चादर जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा, जिसमें जामा मस्जिद अजीतपुरा, घंटाघर और मोहल्ला नदीपुरा जैसे इलाकों से होते हुए दोबारा बस स्टैंड पहुंचा। इसके बाद चादर को वाहन के माध्यम से टेटा जमालपुर स्थित दरगाह शरीफ ले जाया गया। दरगाह पहुंचने पर फातिहा पढ़ी गई और उर्स कमेटी द्वारा चादर पेश की गई। इस मौके पर माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक और श्रद्धामय बना रहा।

Baba Jamal Shah Dargah: स्थानीय लोगों की रही अहम भूमिका

उर्स के सफल आयोजन में कमेटी के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों की अहम भूमिका रही। कार्यक्रम में उर्स कमेटी के सदर अंसार कुरैशी, जनरल सेक्रेटरी जावेद किरमानी, मुबीन अली प्रधान, रहीस अली, कल्लू निजाम राईन, बाकर हुसैन, फिरोज अली तालबेहट, रफीक अली, जुबेर पठान, रज्जब अली शाह और इमरान खान सहित कई लोग मौजूद रहे। सभी ने मिलकर आयोजन को व्यवस्थित और सफल बनाने में सहयोग दिया।

कव्वाली की महफिल से गूंजेगी दरगाह

उर्स के दूसरे दिन यानी 26 अप्रैल को मशहूर कव्वाल एजाज जानी अपनी शानदार प्रस्तुति देंगे। उनकी कव्वालियों का अकीदतमंदों को बेसब्री से इंतजार है। वहीं 27 अप्रैल को दिल्ली से आने वाले इंटरनेशनल कव्वाल कमर वारसी अपनी सूफियाना कलाम से महफिल को सजाएंगे। इन दो दिनों तक दरगाह परिसर में कव्वाली की महफिल सजेगी, जिसमें लोग देर रात तक सूफी संगीत का आनंद लेंगे।

उर्स का आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, भाईचारे और सूफी संस्कृति का प्रतीक भी है। यहां हर धर्म और समुदाय के लोग एक साथ आकर बाबा के दरबार में सिर झुकाते हैं और अमन-चौन की दुआ करते हैं। ऐसे आयोजनों से समाज में एकता और सद्भाव का संदेश भी जाता है, जो आज के समय में बेहद जरूरी है।

क्षेत्र में बढ़ी रौनक

उर्स के चलते पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना हुआ है। स्थानीय बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है और दूर-दराज से आए लोगों के कारण गांव की रौनक देखते ही बन रही है। प्रशासन भी आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए सतर्क नजर आ रहा है। कुल मिलाकर, हजरत बाबा जमालशाह का उर्स एक ऐसा धार्मिक आयोजन है, जो आस्था, संस्कृति और संगीत का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। आने वाले दो दिनों तक कव्वाली की महफिल इस आयोजन को और भी खास बना देगी।

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