संगठित गिरोह का पर्दाफाश
पुलिस जांच में सामने आया कि यह एक संगठित गिरोह था, जिसका मुख्य सरगना रवि लखैरा है। यह गिरोह अवैध रूप से नकली शराब बनाकर उसे मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में सप्लाई करता था। गिरोह का नेटवर्क इतना मजबूत था कि वे सरकारी ठेकों और ढाबों तक अपनी नकली शराब पहुंचाते थे। अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि अधिक मुनाफा कमाने के लालच में उन्होंने यह अवैध धंधा शुरू किया था। नकली शराब बनाने के लिए वे हरियाणा से स्प्रिट मंगवाते थे और अन्य राज्यों से नकली लेबल, ढक्कन, होलोग्राम और पैकिंग सामग्री जुटाते थे।
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि गंगापुरम कॉलोनी में एक संदिग्ध स्थान पर अवैध गतिविधियां चल रही हैं। सूचना के आधार पर छापेमारी की गई, जहां एक घर में अवैध शराब बनाने की फैक्ट्री संचालित होती पाई गई। मौके से बड़ी मात्रा में खाली बोतलें, नकली ढक्कन, लेबल, क्यूआर कोड, ड्रम, पाइप और अन्य उपकरण बरामद किए गए। इसके अलावा तैयार शराब के पैक भी मिले, जिन्हें बाजार में बेचने की तैयारी थी।
करोड़ों के सामान और नकदी की बरामदगी
इस कार्रवाई में पुलिस ने कुल मिलाकर लगभग 67 लाख 79 हजार 989 रुपये की संपत्ति जब्त की है। इसमें नकदी, बैंक खातों में जमा रकम और वाहन शामिल हैं।
बरामदगी में शामिल हैं:
- 5329 नकली ढक्कन
- 145820 नकली लेबल
- 22526 नकली क्यूआर कोड
- 9109 खाली पव्वे
- 750 गत्ते नकली ब्रांडिंग के
- 17 बड़े और 4 छोटे ड्रम
- RO मशीन और बोतल सीलिंग मशीन
- फूड कलर के डिब्बे
इसके अलावा एक ऑडी कार, क्रेटा, स्विफ्ट कार और एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई हैं। पुलिस ने अभियुक्तों के पास से 5.5 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं, जबकि 8.29 लाख रुपये बैंक खातों में फ्रीज कराए गए हैं।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने मौके से पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मुख्य सरगना भी शामिल है। सभी के खिलाफ आबकारी अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता (BNS) और कॉपीराइट एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। गिरफ्तार अभियुक्तों में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के निवासी शामिल हैं, जो लंबे समय से इस अवैध कारोबार में संलिप्त थे।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह पुलिस से बचने के लिए लगातार अपनी फैक्ट्री का स्थान बदलता रहता था। वे स्थानीय मजदूरों की बजाय दूसरे राज्यों से लोगों को बुलाकर काम करवाते थे, जिससे पहचान का खतरा कम हो सके। हाल ही में उन्होंने ललितपुर में अपने घर में ही फैक्ट्री स्थापित की थी और पास में एक कमरा किराए पर लेकर स्टॉक रखा था।
स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़
इस तरह की नकली शराब न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद खतरनाक है। फूड कलर और अन्य रसायनों से बनाई गई शराब गंभीर बीमारी या जानलेवा साबित हो सकती है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
इस सराहनीय कार्य के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा कार्रवाई में शामिल टीमों को 25 हजार रुपये का नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा। ललितपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। यह कार्रवाई न सिर्फ कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए भी बेहद जरूरी कदम है। पुलिस का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, जिससे ऐसे अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
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